अहसान

Posted by aryan meena on 01:12 PM, 19-Jan-14

अहसान इतना सा कर दे, मूझे गले से लगा ले। अहसान इतना सा कर दे, मूझे जी भर प्यार कर ले। मूझे कोई रोके ना, हाँ मूझे कोई रोके ना, आज प्यार को निहार लेने दे। एक पल छूले तू मूझे, हाँ छूले तू मूझे, आज दूनीया से बेगाना कर दे। गुनगुनाता है मेरा दिल, हाँ गुनगुनाता है मेरा दिल, आज दिल का हाल बयां कर लेने दे। ख्वाब है तू मेरा, हाँ ख्वाब... [Read More]

बन जा तु विद्रोही

Posted by aryan meena on 10:39 AM, 27-Dec-13

Thumbnailकर अधर्म का नाश, कर पापीयो का विनाश। मचा दे तु संग्राम, बन जा तु विद्रोही। दहाङ आज तु सीना तान, बिछा दे पापियोँ की लाश। बचा तु हर प्राणी की जान, बन जा तु विद्रोही। माथे पे तिलग लगा, दुश्मन को तु भगा। दुनीया को दे बता, बन जा तु विद्रोही। जिन्दगी है कुछ पलो की, इन पलो मेँ तु इतिहास रच दे। वीर है तु... [Read More]

मेवाङ केसरी - महाराणा प्रताप (1572-1597)

Posted by aryan meena on 02:18 PM, 26-Nov-13

Thumbnailमहाराणा प्रताप का जन्म 9 मई , 1540 को कटारगढ (कुम्भलगढ दुर्ग) मेँ हुआ। इनके पिता महाराणा उदयसिँह और उनकी माता जैवतबाई थी। उदयपुर मेँ गोगुंदा नामक स्थान पर 28 फरवरी , 1572 को महाराणा प्रताप का राज्याभिषेक हुआ। महाराणा प्रताप को मेवाङ केसरी कहते है। अकबर ने महाराणा प्रताप के पास चार बार सन्धि वार्ता हेतु शिष्टमण्डल भेजे थे। 1572 मेँ जलाल खाँ... [Read More]

हिन्दूपथ - राणा साँगा (1509-1528)

Posted by aryan meena on 11:07 AM, 26-Nov-13

महाराणा साँगा का जन्म 12 अप्रेल 1482 को तथा राज्याभिषेक 24 मई 1509 को हुआ। ये महाराणा कुंभा के पौत्र तथा महाराणा रायमल के पुत्र थे। 1518 मेँ राणा सांगा ने मालवा के शासक मोहम्मद खिलजी द्वितीय को गागरोण के युद्ध मेँ पराजित किया। राणा साँगा ने 1518 मेँ खातोली युद्ध और 1519 मेँ बाङी के युद्ध मेँ इब्राहीम लोदी की मियाँ... [Read More]

महाराणा कुंभा (1433-1468)

Posted by aryan meena on 03:42 PM, 25-Nov-13

महाराणा कुंभा महाराणा मोकल के पुत्र थे। उनकी माता का नाम सौभाग्य देवी था। मोकल की हत्या के बाद राणा कुंभा मेवाङ के शासक बने। महाराणा कुंभा को राजगुरु , तातगुरु , नाटकराज का कर्त्ता , धीमान , हालगुरु , राणो रासो , हिन्दु सुरत्ताण , अभिनव भरताचार्य , शैलगुरु , नंदिकेश्वरावतार उपाधियाँ प्राप्त हुई। कुंभा को राजस्थान की स्थापत्य कला का पिता... [Read More]

रत्नसिँह (1302-1303)

Posted by aryan meena on 11:50 AM, 25-Nov-13

1303 मेँ अलाउद्दीन ने पद्मिनी को हथियाने के लिए चित्तौङ दुर्ग पर आक्रमण किया। मलिक मुहम्मद जायसी के पद्मावत ग्रंथ की रचना शेरशाह सूरी के समय 1540 मेँ की गई, के अनुसार पद्मिनी सिंहलद्वीप (श्रीलंका) के गन्धर्वसेन नामक राजा की पुत्री थी। रत्नसिँह से वार्ता के दौरान अलाउद्दीन ने पद्मिनी का प्रतिबिम्ब दर्पण मेँ देखा , उसे पाने के लिए अलाउद्दीन ने... [Read More]

हम्मीर देव ( 1282 - 1301)

Posted by aryan meena on 09:53 AM, 25-Nov-13

हम्मीर देव ने अपने पिता जयसिँह के किये हुए 32 वर्षोँ के शासन की याद मेँ रणथम्भौर दुर्ग मेँ 32 खंभो की छतरी बनवाई जिसे न्याय की छतरी भी कहते हैँ । हम्मीर देव ने पद्मला तालाब का निर्माण करवाया। हम्मीरदेव के बलवान नामक शिलालेख मेँ दो कोटी यजनोँ का उल्लेख मिलता है , इसका पुरोहित विश्वरूप था। 1291 - 1292 मेँ... [Read More]

अढाई दिन का झोपङा देव भाषा का विद्यालय था।

Posted by aryan meena on 09:22 AM, 25-Nov-13

1158 मेँ अजमेर मेँ इस संस्क्रत कोलेज का निर्माण विग्रहराज चतुर्थ ने करवाया। इसमेँ सरस्वती देवी का मंदिर स्थित था। 1198 मेँ मोहम्मद गौरी ने इस विद्यालय को तोङकर इसके तीन मंदिरोँ को अपने गुलाम सेनापति कुतुबुद्दीन ऐबक को अढाई दिन मेँ मस्जिद के रूप मेँ परिवर्तित करने का आदेश दिया , इसलिये यह अढाई दिन के झोपङे के नाम से... [Read More]

इस्लाम का शत्रु - मिहिर भोज प्रथम (836 - 889 ई.)

Posted by aryan meena on 08:18 AM, 25-Nov-13

प्रतिहारोँ का सबसे शक्तिशाली शासक मिहिर भोज वैष्णव धर्मानुयायी था। मिहिर भोज ने अपने पिता रामभद्र की हत्या कर प्रतिहारोँ का शासक बना , उसे प्रतिहारोँ मेँ पित्रहंता कहा जाता है। मिहिर भोज की उपाधियाँ प्रभास , आदिवराह थी। मिहिर भोज कट्टर इस्लाम विरोधी था , उसने बलपूर्वक मुसलमानोँ को हिन्दू बनाया। इसलिए मिहिर भोज को अरबो का अमित्र , इस्लाम का शत्रु... [Read More]

जसवंतसिँह राठौङ - एक वीर हिन्दु योद्धा

Posted by aryan meena on 11:13 PM, 24-Nov-13

जसवंतसिँह का जन्म 24 दिसम्बर , 1626 को बुरहानपुर मेँ हुआ था। उत्तराधिकार के युद्ध के अंतर्गत 15 अप्रेल , 1658 को मध्यप्रदेश मेँ गंभीरी नदी के तट पर धरमत का युद्ध लङा गया जिसमेँ औरंगजेब ने दाराशिकोह व जसवंत सिँह राठौङ की संयुक्त सेना को पराजित किया। महाराजा जसवंत सिँह धरमत के युद्ध स्थल से लौटकर चार दिन बाद 19 अप्रेल... [Read More]

राजस्थान की झीले - 2

Posted by aryan meena on 04:50 PM, 24-Nov-13

¤फतेहसागर झील (उदयपुर) >फतेहसागर झील का निर्माण 1688 मेँ महाराणा जयसिँह ने कराया था। >1888 मेँ आयी भयंकर बारीश के कारण फतेहसागर झील पर स्थित बाँध तहस नहस हो गया था। महाराणा फतेहसिँह ने बाँध की मरम्मत करवाई , उनके नाम पर ही झील फतेहसागर झील कहलाई। >फतेहसागर पर स्थित बाँध की आधारशिला डयूक आफ कनोट ने रखी, यह बाँध कनोट बाँध कहलाता... [Read More]

हिन्दुओँ की रक्षा के लिए गुरू गोविन्दसिँह ने खालसा सम्प्रदाय की स्थापना की

Posted by aryan meena on 06:40 PM, 23-Nov-13

सिक्खोँ के नवेँ गुरु तेग बहादुर ने औरंगजेब की धार्मिक नीति का घोर विरोध किया। इस पर औरंगजेब बङा क्रोधित हुआ और उन्हेँ दिल्ली बुलाकर बन्दी बना लिया गया। जब गुरु तेग बहादुर ने इस्लाम धर्म स्वीकार करने से इन्कार कर दिया तो उन्हेँ 1675 मेँ यातनाएँ देकर सिर को अलग कर दिया। गुरु तेग बहादुर की मौत के बाद उनके... [Read More]

औरंगजेब की धार्मिक नीति के कारण सतनामियोँ ने किया विद्रोह

Posted by aryan meena on 06:08 PM, 23-Nov-13

सतनामी नारनौल और मेवात जिले मेँ रहते थे। औरंगजेब के धार्मिक अत्याचारोँ के कारण उनमेँ तीव्र असन्तोष था। 1672 मेँ एक मुगल सैनिक ने एक सतनामी से दुर्व्यवहार किया और उसका सिर फोङ दिया। इस पर सतनामियो का क्रोध भङक उठा और उन्होँने उस मुगल सैनिक को मार डाला। नारनौल के मुगल फौजदार करतलब खाँ पर आक्रमण कर दिया। नारनौल पर सतनामियोँ... [Read More]

औरंगजेब की धार्मिक नीति के कारण जाटोँ ने किया विद्रोह

Posted by aryan meena on 05:52 PM, 23-Nov-13

औरंगजेब की धार्मिक कट्टरता की नीति के कारण जाटोँ ने विद्रोह कर दिया। मथुरा का मुगल फौजदार अब्दुलनबी कट्टर मुसलमान था। 1669 मेँ स्थानीय जाटोँ ने गोकुल जाट की अगुवाई मेँ विद्रोह कर दिया। जाटोँ ने मुगल फौजदार अब्दुलनबी को मार दिया। इस पर औरंगजेब ने जाटोँ के दमन के लिए एक विशाल सेना भेजी। तिलपत नामक स्थान पर जाटोँ और मुगलो... [Read More]

औरंगजेब का हिन्दुओँ पर अत्याचार

Posted by aryan meena on 05:12 PM, 23-Nov-13

औरंगजेब एक कट्टर सुन्नी मुसलमान था। वह इस्लाम धर्म मेँ घोर आस्था रखता था। इस वजह से वह कुरान के अनुसार शासन का संचालन करना , इस्लाम की रक्षा और उसका विस्तार करना अपना पवित्र कर्त्तव्य मानता था। औरंगजेब ने हिन्दुओँ को नये मन्दिर बनाने और पुराने मन्दिरोँ की मरम्मत पर रोक लगा दी। 1669 मेँ औरंगजेब ने हिन्दुओँ के समस्त मन्दिरोँ... [Read More]

आर्यभट्ट

Posted by aryan meena on 07:50 PM, 21-Nov-13

Thumbnailआर्यभट्ट की पुणे मेँ मुर्ति आर्यभट्ट उपग्रह भारतीय ज्योतिष शास्त्र के इतिहास की शुरूआत आर्यभट्ट से होती है। आर्यभट्ट के जीवन के बारे मेँ जानकारी उपलब्ध नहीँ है। उनके कार्यो की जानकारी उनके द्वारा लिखित आर्यभट्टीय ग्रंथ से मिलती है। इस ग्रंथ से मालुम होता है कि यह ग्रंथ उनके द्वारा 23 वर्ष की आयु मेँ 499 ई. मेँ लिखा गया था। इस... [Read More]

हम अपने विज्ञान और वैज्ञानिको को कमतर क्योँ आँकते है

Posted by aryan meena on 05:43 PM, 17-Nov-13

भारत के पुर्व राष्ट्रपति और वैज्ञानिक अपनी पुस्तक विजन 2020 मेँ एक घटना का उल्लेख करते है " मेरे कमरे मेँ दीवार पर एक बहुरंगी कलेण्डर टंगा है । यह सुन्दर कलेण्डर जर्मनी मेँ छपा है तथा इसमेँ आकाशस्थ उपग्रहोँ द्वारा यूरोप और अफ्रीका के खीँचे गये चित्र अंकित हैँ । कोई भी व्यक्ति इन चित्रोँ को देखता है तो प्रभावित... [Read More]

पुरातन भारत की सीमाए

Posted by aryan meena on 01:46 PM, 17-Nov-13

भारत के उत्तर मेँ हिमालय पर्वत तथा त्रिविष्टम (तिब्बत) तक हमारी उत्तरी सीमा थी इसमेँ कैलास मानसरोवर भी शामिल था आज वहाँ जाने के लिए चीन से विजा लेना पङता है उत्तर - पश्चिम मेँ उपगणस्थान (अफगानिस्तान) भी सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य और अशोक के राज्यकाल तक हमारा देश का अंग था महाभारत काल मेँ यह गन्धार देश के नाम से जाना जाता था गांधारी यहीँ... [Read More]

स्वामी विवेकानन्द

Posted by aryan meena on 12:42 PM, 17-Nov-13

नरेन्द्रनाथ दत्त का जन्म कोलकाता मेँ उच्चकुलीन क्षत्रिय परिवार मेँ 12 जनवरी 1863 को हुआ उनका शानदार व्यवहार , असाधारण स्मरण शक्ति , नैतिक पवित्रता उनकी माँ भुवनश्वरी की देन थी जो एक विदुषी महिला थी। उनके पिता विश्वनाथ दत्त कलकत्ता हाईकोर्ट मेँ वकील थे। नरेन्द्र ने हाई स्कूल की परीक्षा प्रथम श्रेणी मेँ उत्तीर्ण की और बङी योग्यता से बीए की... [Read More]

दौसा के दर्शनीय स्थल

Posted by aryan meena on 02:44 PM, 16-Nov-13

मेहंदीपुर बालाजी का मंदिर - इस मंदिर को दो पहाङियो के बीच घाटी मेँ होने के कारण घाटी मेहंदीपुर भी कहते है मंदिर भूत - प्रेत के निवारण के लिए प्रसिद्ध है हर्षद् माता का मंदिर - यह मंदिर आभानेर मेँ स्थित है यह प्रतिहारकालीन महामारू शैली का नायाब उदाहरण है यह वैष्णव सम्प्रदाय से सम्बन्धित मूल रूप से पंचायतन मंदिर है यहाँ से प्रद्मुमन (क्रष्ण -... [Read More]